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New Tax Regime:  टैक्स बचाने के उपाय इंदौर विकल्पों से आप बचा सकते हैं अपना टैक्स जाने कौन से तरीके

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New Tax Regime:  टैक्स बचाने के उपाय इंदौर विकल्पों से आप बचा सकते हैं अपना टैक्स जाने कौन से तरीके

New Tax Regime आयकर बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका – भारत सरकार ने नई कर व्यवस्था में आकर्षक बनाने के लिए पुरानी कर व्यवस्था के कुछ लाभों को नई कर व्यवस्था में शामिल किया है। भारत में आयकरदाता को अपने आय को टैक्स के रूप में जमा करने के लिए दो विकल्प मिलते हैं। एक है पुरानी कर व्यवस्था जिसमें आयकरदाता को टैक्स एग्जेंप्शन और डिडक्शन का लाभ मिलता है, जबकि दूसरा है नई कर व्यवस्था जिसमें ज्यादातर टैक्स छूट और डिडक्शन का फायदा नहीं होता है।

कितने लाख पर टैक्स लगता है?

एनपीएस में जमा राशि पर डिडक्शन

एनपीएस में जमा राशि पर डिडक्शन

सरकार ने न्यू इनकम टैक्स रिजीम के अंतर्गत 7 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को टैक्स मुक्त करके इसे आकर्षक बनाने का प्रयास किया है। इसके अलावा, कुछ विशेष डिडक्शन हैं जो नौकरीपेशा कर्मचारियों को नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में भी लाभ प्रदान कर सकते हैं। नई कर व्यवस्था चयन करने वाले आयकरदाता दो विशेष डिडक्शनों का उपयोग करके अपनी कर देयता को कम कर सकते हैं – स्टैंडर्ड डिडक्शन और एनपीएस में नियोक्ता द्वारा दिए गए अंशदान पर डिडक्शन। इन डिडक्शनों का उपयोग करके वेतनभोगी व्यक्ति अपनी कर देयता को कम कर सकता है। उदाहरण के लिए, स्टैंडर्ड डिडक्शन के अंतर्गत नौकरीपेशा व्यक्ति को 50,000 रुपये तक की कटौती मिलती है, जिससे उसकी टैक्स गणना कम होती है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction)

स्टैंडर्ड डिडक्शन वह कटौती है जिसे आयकरदाता की आय से काटकर अलग कर दिया जाता है और इसके बाद बची हुई आमदनी पर टैक्स की गणना की जाती है। नौकरीपेशा व्यक्ति को स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में 50,000 रुपये तक की कटौती मिलती है, जबकि फैमिली पेंशनर्स को 15,000 रुपये की कटौती स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में दी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी नौकरीपेशा व्यक्ति की सालाना आय 8 लाख रुपये है, तो इससे उसकी टैक्स गणना 7,50,000 रुपये पर होगी, बिना किसी कागज के। नई टैक्स व्यवस्था चयन करने वाले आयकरदाता भी अब स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ उठा सकते हैं। इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय, स्टैंडर्ड डिडक्शन को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 16(ia) के तहत वेतन/पेंशन से होने वाली आय के हेड में क्लेम किया जाता है, जबकि फैमिली पेंशन को अन्य स्रोतों से आय के हेड में रखा जाता है।

एनपीएस में जमा राशि पर डिडक्शन

(Deduction on amount deposited in NPS)

न्यू टैक्स रिजीम के तहत नौकरीपेशा कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में जमा की गई रकम पर भी स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है। इसे पाने के लिए कुछ शर्तों का पूरा होना जरूरी है। पहली शर्त है कि एनपीएस में यह रकम नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी के टियर-1 (Tier-I) NPS अकाउंट में जमा की जानी चाहिए। दूसरी, यह राशि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के वेतन के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह लिमिट 14 फीसदी की है। वेतन से अर्थ बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता को मिलाकर बनने वाली राशि से है। नौकरीपेशा लोग इस डिडक्शन का लाभ इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD (2) के तहत ले सकते हैं। एनपीएस खाते में जमा की गई इस रकम का जिक्र फॉर्म 16 के भाग B (Part B of Form 16) में मिलेगा।

8 लाख तक आय  टैक्‍स फ्री

इन दोनों डिडक्‍शन का लाभ मिलने के बाद सालाना आठ रुपये कमाने वाले नौकरीपेशा व्‍यक्ति की आय टैक्‍स फ्री हो सकती है. सालाना 8 लाख रुपये कमाई में से 50 हजार रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में घटाने के बाद उसकी टैक्सेबल आय 7.5 लाख रुपये रह जाएगी. अब अगर नियोक्‍ता कर्मचारी के टियर-1 एनपीएस एकाउंट में 50 हजार रुपये जमा कर दे, तो टैक्सेबल इनकम और घटकर 7 लाख रुपये रह जाएगी. जिस पर न्यू टैक्स रिजीम के तहत कोई टैक्स नहीं देना होगा

NPS में जमा राशि पर डिडक्शन

न्यू टैक्स रिजीम के अंतर्गत, नौकरीपेशा कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में जमा की गई रकम पर भी स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है। इसे प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तें होती हैं, जिनमें से पहली शर्त है कि राशि नियोक्‍ता द्वारा टियर-1 (Tier-I) NPS अकाउंट में जमा की जानी चाहिए। दूसरी, यह राशि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के वेतन के 10 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह लिमिट 14 फीसदी की है, जिसमें बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता शामिल होता है।नौकरीपेशा व्यक्ति इस डिडक्शन का लाभ इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD (2) के तहत ले सकता है, और इस राशि का जिक्र फॉर्म 16 के भाग B (Part B of Form 16) में मिलेगा।

इन दोनों डिडक्शन के लाभ से सालाना 8 लाख रुपये कमाने वाले नौकरीपेशा व्यक्ति की आय टैक्स फ्री हो सकती है। उसकी सालाना कमाई से 50,000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में काटने के बाद उसकी टैक्सेबल आय 7.5 लाख रुपये रह जाएगी। अगर नियोक्ता कर्मचारी अपने टियर-1 एनपीएस अकाउंट में 50,000 रुपये जमा करता है, तो उसकी टैक्सेबल इनकम 7 लाख रुपये रहेगी, और इस पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।

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